कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी;
चंद सिक्कों के लिए तुने क्या नहीं खोया है;
माना नहीं है मखमल का बिछोना मेरे पास;
पर तु ये बता, कितनी राते चैन से सोया है।
तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो;
किस-किस को बताओगे घर क्यों नहीं जाते।
अगर इश्क़ गुनाह है गुनाहगार है खुदा;
जिसने बनाया दिल किसी पर आने के लिए।
मोहब्बत की हद्द है सितारों से आगे;
प्यार का जहाँ है बहारों से आगे;
वो दीवानों की कश्ती जब बहने लगी;
तो बहते बह गई किनारों से आगे।
कहते हैं लोग खुदा की इबादत है;
ये मेरी समझ में तो एक जहालत है;
चैन न आए दिल को, रात जाग के गुजरे;
जरा बताओ दोस्तों क्या यही मोहब्बत है।
है इश्क़ की मंज़िल में हाल के जैसे;
लुट जाए कहीं राह में सामान किसी का।
ना इश्क़ का इज़हार किया, ना ठुकरा सके हमें वो;
हम तमाम ज़िंदगी मज़लूम रहे, उनके वादा मोहब्बत के।
एहसास के दामन में आंसू गिराकर देखो;
प्यार कितना है आजमा कर देखो;
तुम्हें भूल कर क्या होगी दिल की हालत;
किसी आईने पे पत्थर गिराकर तो देखो।
लोगों ने कहा तुम उसको याद क्यों करते हो;
जो तुम्हे याद ही नहीं करता;
तड़प कर दिल बोला;
मोहब्बत करने वाले कभी मुक़ाबला नहीं करते।
इश्क़ की बंदगी दी है तो हुस्न की इबादत जरूरी है;
इश्क़ से जीने की आस रहेगी और हुस्न से तड़प का सकून।



