आँखों में इश्क़, लब पे ख़ामोशी;
अंदाज़ में इकरार, जिस्म में इंकार;
कहाँ जाएं मोहब्बत करने वाले;
एक तरफ जन्नत, दूसरी तरफ जहन्नुम।
इश्क़ पर ज़ोर नहीं, यह वो आतिश ग़ालिब;
के लगाए ना लगे और बुझाए ना बुझे।
ये इश्क़ के घाव बहुत गहरे है;
दर्द भी देते हैं और भरते भी नहीं।
ना पूछ दिल की हक़ीक़त मगर ये कहता है;
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया।
वो मेरे दिल पर सिर रखकर सोई थी बेखबर;
हमने धड़कन ही रोक ली कि कहीं उसकी नींद ना टूट जाए।
आँसू आ जाते हैं आँखों में;
पर लबों पर हंसी लानी पड़ती है;
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो;
जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है।
रिश्तों का धागा इतना कच्चा नहीं होता;
किसी का दिल तोड़ना अच्छा नहीं होता;
प्यार तो दिल की आवाज़ है;
कौन कहता है एक तरफ़ का प्यार सच्चा नहीं होता।
कितना प्यार है उनसे काश वो ये जान लें;
वो ही है ज़िंदगी मेरी ये बात मान लें;
उनको देने को नहीं कुछ पास हमारे;
बस एक जान है हमारी जब चाहे मांग लें!
जिनको हमने चाहा मोहब्बत की हदें तोड़ कर;
आज उसने देखा नहीं निगाह मोड़ कर;
ये जान कर बहुत दुःख हुआ मुझे;
कि वो खुद भी तन्हा हो गये मुझे छोड़ कर!
ऐ मोहब्बत, तुझे पाने की कोई राह नहीं;
तू तो उसे ही मिलेगी, जिसे तेरी परवाह नहीं।



