मोहब्बत नहीं है क़ैद मिलने या बिछड़ने की;
ये इन खुदगर्ज़ लफ़्ज़ों से बहुत आगे की बात है।
मुद्दत से दूर थे हम-तुम;
एक ज़माने के बाद मिलना अच्छा लगा;
सागर से गहरा लगा प्यार आपका;
तैरना तो आता था पर डूबना अच्छा लगा।
कितने तोहफे देती है ये मोहब्बत भी यार;
दुःख अलग रुस्वाई अलग, जुदाई अलग तन्हाई अलग।
उस एक चेहरे ने हमें तन्हा कर दिया वरना;
हम तो अपने आप में ही एक महफ़िल हुआ करते थे।
इश्क़ ने हमें बेनाम कर दिया;
हर ख़ुशी से अनजान कर दिया;
हमने कभी नहीं चाहा कि हमें इश्क़ हो;
पर उनकी एक नज़र ने हमें नीलाम कर दिया।
ना रूठना हमसे हम मर जाएंगे;
दिल की दुनिया तबाह कर जाएंगे;
प्यार किया है हमने कोई मज़ाक नहीं;
दिल की धड़कन तेरे नाम कर जाएंगे।
मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ;
मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ;
कब पूछा मैंने कि क्यूँ दूर हो मुझसे;
मैं दिल रखता हूँ तेरे हालात समझता हूँ।
तु ही मिल जाए मुझे बस इतना ही काफी है;
मेरी हर सांस ने बस ये ही दुआ मांगी है;
जाने क्यूँ दिल खिंचा चला जाता है तेरी तरफ;
क्या तूने भी मुझे पाने की दुआ मांगी है।
तेरे बगैर इस ज़िन्दगी की हमें जरुरत नहीं;
तेरे सिवा हमें किसी और की चाहत नहीं;
तुम ही रहोगे हमेशा मेरे दिल में;
किसी और को इस दिल में आने की इजाज़त नहीं।
एक अजनबी से बात क्या हुई क़यामत हो गयी;
सारे शहर को इस चाहत की खबर हो गयी;
क्यूँ ना दोष दू इस दिल-ऐ-नादाँ को;
दोस्ती का इरादा था और मोहब्बत हो गयी।



