रुलाना हर किसी को आता है;
हँसाना भी हर किसी को आता है;
रुला के जो मना ले वो सच्चा यार है;
और जो रुला के खुद भी रो पड़े वही सच्चा प्यार है।
नज़रे मिले तो प्यार हो जाता है;
पलके उठे तो इज़हार हो जाता हैं;
ना जाने क्या कशिश हैं चाहत में;
कि कोई अनजान भी हमारी;
जिंदगी हक़दार हो जाता है।
लबों की हँसी आपके नाम कर देंगे;
हर खुशी आप पर कुर्बान कर देँगेँ;
जिस दिन होगी कमी मेरे प्यार;
उस दिन हम इस दुनिया को सलाम कर देंगे।
मुहब्बत के लिए इक ज़िंदगी कम पड़ गयी होगी;
तभी तो सात जन्मों का खुदा ने कर दिया बंधन।
जख्म बन जाने की आदत है उन्हें;
रुला कर मुस्कुराने की आदत है उन्हें;
मिलेंगे कभी तो खूब रुलाएंगे;
सुना हैं रोते हुए लिपट जाने की आदत है उन्हें।
जो आपने न लिया हो, ऐसा कोई इम्तिहान न रहा;
इंसान आखिर मोहब्बत में इंसान न रहा;
है कोई बस्ती, जहां से न उठा हो ज़नाज़ा दीवाने का;
आशिक की कुर्बत से महरूम कोई कब्रिस्तान न रहा।
जनाजा रोक कर वो मेरा कुछ इस अन्दाज़ मे बोले;
गली छोड्ने को कहा था, तुमने तो दुनियां ही छोड दी।
तुम रख ना सकोगे मेरा तौफ़ा संभालकर;
वरना मैं अभी दे दूं जिस्म से रूह निकाल कर।
किसी की क्या मजाल थी;
जो हमें खरीद सकता;
हम तो खुद ही बिक गये;
खरीददार देख के।
अपनी तो यारो बस इतनी सी कहानी है;
कुछ तो खुद से ही बर्बाद थे;
कुछ इश्क की मेहरबानी है।



