मोहब्बत में किसी का इंतजार मत करना;
हो सके तो किसी से प्यार मत करना;
कुछ नहीं मिलता मोहब्बत कर के;
खुद की ज़िन्दगी बेकार मत करना।
बस यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ;
धूप कितनी भी तेज़ हो समन्दर नहीं सूखा करते।
एक पल में ज़िन्दगी भर की उदासी दे गया;
वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया;
नोच कर शाखों के तन से खुश्क पत्तों का लिबास;
ज़र्द मौसम बाँझ रुत को बे-लिबासी दे गया।
न वो सपना देखो जो टूट जाये;
न वो हाथ थामो जो छूट जाये;
मत आने दो किसी को करीब इतना;
कि उसके दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।
ना जाने क्यों कोसते हैं लोग बदसूरती को;
बर्बाद करने वाले तो हसीन चेहरे होते हैं।
बढ़ी जो हद से तो सारे तिलिस्म तोड़ गयी;
वो खुश दिली जो दिलों को दिलों से जोड़ गयी;
अब्द की राह पे बे-ख्वाब धड़कनों की धमक;
जो सो गए उन्हें बुझते जगो में छोड़ गयी।
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली;
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली;
तुम मोहब्बत को खेल कहते हो;
हम ने बर्बाद ज़िन्दगी कर ली।
हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे;
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे;
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया;
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।
क्या कुछ न किया है और क्या कुछ नहीं करते;
कुछ करते हैं ऐसा ब-खुदा कुछ नहीं करते;
अपने मर्ज़-ए-गम का हकीम और कोई है;
हम और तबीबों की दवा कुछ नहीं करते।
हुआ जब इश्क़ का एहसास उन्हें;
आकर वो पास हमारे सारा दिन रोते रहे;
हम भी निकले खुदगर्ज़ इतने यारो कि;
ओढ़ कर कफ़न, आँखें बंद करके सोते रहे।



