sms

तन्हाइयों के शहर में एक घर बना लिया;
रुसवाइयों को अपना मुक़द्दर बना लिया;
देखा है यहाँ पत्थर को पूजते हैं लोग;
हमने भी इसलिए अपने दिल को पत्थर बना लिया।

sms

दिल के दर्द को दिल तोड़ने वाले क्या जाने;
प्यार की रस्मों को यह ज़माने वाले क्या जाने;
होती है कितनी तकलीफ कब्र के नीचे;
यह ऊपर से फूल चढ़ाने वाले क्या जाने।

ताबीर जो मिल जाएं तो एक ख्वाब बहुत था;
जो शख्स गंवा बैठी हूं नायाब बहुत था;
मैं भला कैसे बचा लेती कश्ती-ए-दिल को सागर से;
दरिया-ए- मोहब्बत में सैलाब बहुत था।

वक़्त गुज़रेगा तो हम संभाल जाएँगे;
मौत आने से पहले समझ जाएँगे;
कि बेवफ़ाई उनकी फ़ितरत है, ना की मजबूरी;
तन्हाई में ही सही, हम फिर से बस जाएँगे।

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।

खुशबु की तरह साथ लगा ले गयी हम को;
कूचे से तेरे बाद-ए-सबा ले गयी हम को;
पत्थर थे कि गौहर थे अब इस बात का क्या ज़िक्र;
इक मौज बहर-हाल बहा ले गयी हम को।

शब्दार्थ:
बाद-ए-सबा = सुबह की ठंडी हवा
गौहर = मोती

sms

वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं;
कहाँ से लायें लफ्ज़ जब हम को मिलते ही नहीं;
दर्द की जुबान होती तो बता देते शायद;
वो ज़ख्म कैसे दिखायें जो दिखते ही नहीं।

sms

आइना भी भला कब किसी को सच बता पाया है;
जब भी देखो दायाँ तो बायां ही नज़र आया है।

sms

अब हवा जिधर जाये मैं भी उधर जाऊंगा;
मैं खुश्बू हूँ हवाओं में बिखर जाऊंगा;
अफ़सोस तुम्हें होगा मुझे सताओगे अगर;
मेरा क्या जितना भी जलाओगे उतना ही निखर जाऊंगा।

sms

अपनी हर बात रखने का दावा किया उसने;
लगा जैसे हकीकत में जीने का बहाना किया उसने;
टूट गया कोई अल्फ़ाज़ों से उनके उनको पता तक नहीं;
ज़िंदगी सिर्फ नाम नहीं मोहब्बत का यह भी सिखाया उसने।

End of content

No more pages to load

Next page