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ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;
आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;
ये मत पूछना किसने दर्द दिया;
वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।

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हो चुके अब तुम किसी के;
कभी मेरी ज़िंदगी थे तुम;
भूलता है कौन मोहब्बत पहली;
मेरी तो सारी ख़ुशी थे तुम।

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जिंदगी भर दर्द से जीते रहे;
दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे;
कई बार सोचा कह दू हाल-ए-दिल उससे;
पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे।

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भूल जाना उसे मुश्किल तो नहीं है लेकिन;
काम आसान भी हमसे कहाँ होते हैं!

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ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है!

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दर्द कितना है बता नहीं सकते;
ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते;
आँखों से समझ सको तो समझ लो;
आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।

हर तमाशाई फक़त साहिल से मंज़र देखता;
कौन दरिया को उलटता कौन गौहर देखता।

Translation:
फक़त : सिर्फ
गौहर : मोती

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क्या ज़रूरत थी दूर जाने की;
पास रहकर भी तो तड़पा सकते थे!

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वो देता है दर्द बस हमी को;
क्या समझेगा वो इन आँखों की नमी को;
​चाहने वालों की भीड़ से घिरा है जो हर वक़्त;
वो महसूस ​क्या ​करेगा ​बस ​एक हमारी कमी को। ​

चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत है;
हम उसकी याद में परेशान बहुत हैं;
वो हर बार दिल तोड़ता है यह कह कर;
मेरी उम्मीदों के दुनियाँ में अभी मुकाम बहुत हैं।

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