दर्द हमेशा अपने ही देते है;
वरना गैरो को क्या पता कि;
तकलीफ किस बात से होती है।
हर बात में आंसू बहाया नहीं करते;
दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते;
लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है;
दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।
जो मेरा था वो मेरा हो नहीं पाया;
आँखों में आंसू भरे थे पर मैं रो नहीं पाया;
एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि;
हम मिलेंगे ख़्वाबों में पर मेरी बदकिस्मती तो देखिये;
उस रात तो मैं ख़ुशी के मारे सो भी नहीं पाया।
एक दिन जब हुआ प्यार का अहसास उन्हें;
वो सारा दिन आकर हमारे पास रोते रहे;
और हम भी इतने खुद गर्ज़ निकले यारों कि;
आँखे बंद कर के कफ़न में सोते रहे।
कभी आंसू कभी ख़ुशी बेची;
हम गरीबों ने बेकसी बेची;
चंद सांसे खरीदने के लिए;
रोज थोड़ी सी जिन्दगी बेची।
कभी दूर जा के रोये कभी पास आके रोये;
हमें रुलाने वाले हमें रुला के रोये;
मरने को तो मरते हैं सभी यारों;
पर मरने का तो मजा ही तब है;
जो दुश्मन भी जनाजे पे आ के रोये।
भूले हैं रफ्ता-रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम;
किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हम से पूछिए।
मंजिलों से बेगाना आज भी सफ़र मेरा;
रात बेसहर मेरी दर्द बेअसर मेरा।
अनुवाद:
बेसहर:कभी ख़त्म न होने वाली
बेअसर:अप्रभावित
यूँ तो हर चीज़ रफ़ू होती है;
मगर दिल का घाव सिलाया नही जा सकता।
मौसम की तरह बदल देते हैं लोग हमनफस अपना;
हमसे तो अपना सितमगर भी बदला नहीं जाता!



