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राह यूँ ही नामुक्क्मल, ग़म-ए-इश्क का फ़साना;
कभी मुझको नींद नहीं आयी, कभी सो गया ज़माना!

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ज़रा सी देर को आये ख्वाब आँखों में;
फिर उसके बाद मुसलसल अज़ाब आँखों में;
वो जिस के नाम की निस्बत से रौशनी था वजूद;
खटक रहा है वही आफताब आँखों में!

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बहुत ही तल्ख़ तजुर्बे का नाम है 'चाहत';
जो तुमको अच्छा लगे, बस उससे प्यार मत करना।

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अभी सूरज नहीं डूबा ज़रा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाउंगा मुझे नाकाम होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते हो क्यों;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो!

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मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना;
भूल जाना मेरा ख्याल ना करना;
हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे;
पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!

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न कोई इलज़ाम न कोई तंज़, न कोई रुसवाई मीर;
दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की!

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उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है;
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है;
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर;
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!

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आप गैरों की बात करते हैं हमने अपने भी आजमायें हैं;
लोग कांटो से बच के चलते हैं, हमनें फूलों से ज़ख्म खाए हैं!

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अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश;
मुद्दतों जीस्त को नाशाद किया है मैंने;
तूने तो एक ही सदमे से किया था दो-चार;
दिल को हर तरह से बर्बाद किया है मैंने!

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हर दिल में दर्द छुपा होता है, बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है;
कुछ लोग आँखों से दर्द बहा लेते हैं और किसी की हंसी में भी दर्द छुपा होता है!

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