एक रास्ता ये भी है मंजिलों को पाने का कि,
सीख लो तुम भी हुनर हाँ में हाँ मिलाने का।
रिश्ता ऐसा हो जिस पर नाज़ हो,
कल जितना भरोसा था उतना ही आज हो;
रिश्ता सिर्फ़ वो नही जो ग़म या ख़ुशी में साथ दे,
रिश्ते वो हैं जो अपने पन का एहसास दें।
लाखों मुफलिस हो गए, लाखों तवंगर हो गए;
खाक में जब मिल गए, दोनों बराबर हो गए।
ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो कुछ आदतें बुरी सीख लो,
ऐब न हों कोई अगर तो लोग महफ़िलों में नहीं बुलाते।
तेरा हुआ ज़िक्र तो हम तेरे सजदे में झुक गए,
अब क्या फर्क पड़ता है मंदिर में झुक गए या मस्जिद में झुक गए।
बस इतनी सी बात समंदर को खल गयी,
एक काग़ज़ की नाँव मुझपे कैसे चल गयी।
रक़ीबों के लिए अच्छा ठिकाना हो गया पैदा,
ख़ुदा आबाद रखे मैं तो कहता हूँ जहन्नम को।
सारे पत्थर नहीं होते हैं मलामत का निशाँ,
वो भी पत्थर है जो मंज़िल का निशाँ देता है।
हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ,
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं।
पढ़ रहा हुं मैं इश्क की किताब,
अगर बन गया वकील तो, बेवफओं की खैर नहीं।



