जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा कैसे कहें;
और जिसे जान लिया हो वो ख़ुदा कैसे हो।

और अब ये कहता हूँ ये जुर्म तो रवा रखता;
मैं उम्र अपने लिए भी तो कुछ बचा रखता।

लाखों मुफलिस हो गए, लाखों तवंगर हो गए;
खाक में जब मिल गए, दोनों बराबर हो गए।

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लो खरीद लो मुझे, एक नज़र के मोल;
अपनी कीमत मेँ, मैं रियायत कर रहा हूँ।

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इस कदर जो आपको हँसा रहा हूँ मैं;
न समझना कोई रिश्ता बना रहा हूँ मैं;
स्वार्थ है मेरा और स्वार्थी हूँ मैं;
बस अपनी अर्थी के पीछे चलने वालो की तादाद बढ़ा रहा हूँ मैं।

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कोई वादा ना कर, कोई इरादा ना कर;
ख्वाहिशों में खुद को आधा ना कर;
ये देगी उतना ही जितना लिख दिया खुदा ने;
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर।

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लिख रहा हूँ अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा;
मेरे लहू का हर एक क़तरा इंक़लाब लाएगा;
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि;
मेरे बाद वतन पे मरने वालों का सैलाब आएगा।

हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है;
जिस तरफ़ भी चल पड़ेगे, रास्ता हो जाएगा।

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अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

मालूम है दुनिया को ये 'हसरत' की हक़ीक़त;
ख़ल्वत में वो मय-ख़्वार है जल्वत में नमाज़ी।

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