उदास लम्हों की न कोई याद रखना;
तूफ़ान में भी वजूद अपना संभाल रखना;
किसी की ज़िंदगी की ख़ुशी हो तुम;
बस यही सोच तुम अपना ख्याल रखना।
इस नए साल में ख़ुशियों की बरसातें हों;
प्यार के दिन और मोहब्बत की रातें हों;
रंजिशें नफ़रतें मिट जायें सदा के लिए;
सभी के दिलों में ऐसी चाहते हों!
लाखों मुफलिस हो गए, लाखों तवंगर हो गए;
खाक में जब मिल गए, दोनों बराबर हो गए।
क्या मज़ा देती है बिजली की चमक मुझ को 'रियाज़';
मुझ से लिपटे हैं मेरे नाम से डरने वाले।
तमाम उम्र नमक-ख़्वार थे ज़मीं के हम;
वफ़ा सरिश्त में थी हो रहे यहीं के हम।
शब्दार्थ:
सरिश्त = जन्मजात गुणवत्ता
उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है;
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो।
शहर ज़ालिमों का है ज़रा संभल कर चलना;
लोग दिल ही निकाल लेते हैं सीने से लगा कर।
हथेली पर रखकर,नसीब अपना क्यों हर शख्स,मुकद्दर ढूँढ़ता है;
अजीब फ़ितरत है, उस समंदर की जो टकराने के लिए,पत्थर ढूँढ़ता है।
नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से;
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं।
सब मिटा दें दिल से, हैं जितनी कि उस में ख़्वाहिशें;
गर हमें मालूम हो कुछ उस की ख़्वाहिश और है।



