अकेला सा महसूस करो जब कभी तन्हाई में;
याद मेरी आये जब जुदाई में;
महसूस करना तुम्हारे करीब हूँ मैं;
जब चाहे देख लेना अपनी ही परछाई में।
दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता।
जूनून-ए-इश्क था तो कट जाती थी रात ख्यालो में;
सजा-ए-इश्क आयी तो हर लम्हा सदियों सा लगने लगा।
रूकता भी नहीं ठीक से चलता भी नही,
यह दिल है कि तेरे बाद सँभलता ही नही।
याद में तेरी आँखें भरता है कोई, हर साँस के साथ तुझे याद करता है कोई;
मौत तो ऐसी चीज़ है जिसको आना ही है, लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज़ मरता है कोई।
रंगीन वादों से लिपटा हुआ तार ले आना,
ऐ डाकिये, तुम अबकी बार मेरा बिछडा हुआ यार ले आना।
मुझे मंज़ूर थे वक़्त के हर सितम मगर,
तुमसे बिछड़ जाना, ये सज़ा कुछ ज्यादा हो गयी।
महीनों गुजर गए ना जाने कब तेरा दीदार होगा,
जिस दिन मिलूंगी तुमसे मेरी ज़िन्दगी का नया साल होगा।
अकसर भुल जाता हूँ मैं तुझे शाम की चाय में चीनी की तरह,
फिर जिंदगी का फीकापन तेरी कमी का एहसास दिला देता है।
साल गुज़र जाते हैं इश्क़ में और,
थम कर रह जाते हैं लम्हें एक चेहरे पर।



