लॉकडाउन में कुछ लोग जानबूझकर देर से रिप्लाई कर रहे हैं ताकि सामने वाले को लगे कि वह काम कर रहे हैं, फ्री नहीं बैठे।
क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया देख देख कर अब मैं इतना शक्की हो चुका हूं कि... . . . . . . . टीवी देखने के बाद रिमोट कंट्रोल से अपनी उंगलियों के निशान भी साफ कर देता हँ।
पापा: सिगरेट, शराब, लड़कियां सब दुश्मन है तुम्हारी। बेटा: और जो दुश्मन से डर जाए वह मर्द ही किस काम का!
आने वाले पीढ़ियों का तो बेड़ा गर्क ही समझो, क्योंकि उनके सयाने बुजुर्ग हम होंगे!
वो मिली भी तो वैक्सीनेशन सेंटर पर, उससे गले मिलते या दो गज की दूरी रखते!
भरोसा कुछ इस कदर उठ गया है लोगों का मुझसे कि, अब बच्चे भी चॉक्लेट और कुरकुरे का पैकेट खुलवाने भी नहीं आते!
भारत में लोग दो काम बेझिझक करते हैं! 1. बैंक वालों को घर किराए पर देना 2. डॉक्टर की पुरानी गाडी खरीदना
पिछली मोहब्बत को ना भूल पाने की वजह, बाबू को दिए हुए तोहफे और कराये गए रिचार्ज भी होते हैं!
पहले लोग बोलते थे कि ज़िन्दगी रही तो फिर मिलेंगे!
अब बोल रहे हैं कि लॉकडाउन खुला तो फिर मिलेंगे!
पहली लहर, दूसरी लहर, तीसरी लहर...!
समझ नहीं आ रहा महामारी है या कोई वेब सीरीज!