बुरा वक़्त पूछ कर नहीं आता साहब;
कई बार जजों को भी वकील करने पड़ जाते हैं!
20 लाख करोड़। सोचो...
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ठेके कुछ दिन और पहले खुल गये होते फिर तो 50 लाख करोड़ कहीं नही गये थे!
किसी भी पार्टी अथवा समुदाय विशेष को भारत बंद का आह्वान करना है तो लॉकडाउन में कर लें, पूरी तरह से सफल रहेगा!
15 लाख की टोपी कम थी?
जो 20 लाख करोड़ का पायजामा पहना दिया वो भी बिना नाड़े का?
मोदी जी ने कहा है "आत्मनिर्भर बनो"!
मतलब... अपना खाना खुद बनाना, खुद अपने कपड़े और बर्तन धोना और आत्म-सम्मान बनाएं रखना!
अपनी पत्नी पर निर्भर न रहो! लॉकडाउन तो अभी लंबा चलेगा!
सरकार द्वारा व्यापारियों के लिये जारी दिशा निर्देश:
थोड़ा खोलो, थोड़ा थोड़ा खोलो, ज़्यादा मत खोलो, थोड़ा बन्द रखो, थोड़ा थोड़ा बन्द रखो, बेशक थोड़ा खोल लो, लेकिन थोड़ा बन्द रखो, मतलब थोड़ा खोलो, ज़्यादा मत खोलो, बिलकुल बन्द भी मत रखो, एकदम खोलो भी मत, थोड़ा खोलो जितना ज़रूरी हो, जितना ज़रूरी हो उतना बन्द रखो यानि जैसे तुम्हें ठीक लगे वैसे कर लो, समझ गये ना, सब साफ़ है ना?
राम युग में दूध मिले और कृष्ण युग में घी;
कोरोना युग में दारु मिले डिस्टेंस बना कर पी!
आप सरकार के भरोसे मत रहें!
सरकार खुद बेवड़ों के भरोसे हैं!
पिछले 6 वर्षों से मैंने कुछ लोगों को यही कहते सुना है काम धंधा ज़ीरो है!
अब वही लोग कह रहे हैं कि लॉकडाउन में लाखों का नुकसान हो गया!
45 दिन शराब ना पीकर जनता ने बता दिया कि वो बिना शराब के ज़िंदा रह सकते हैं!
लेकिन ठेके खोल कर सरकार ने बता दिया कि शराब के बिना सरकार मर जाएगी!



