ऐ खुदा हिचकियों में कुछ तो फर्क डाला होता,
अब कैसे पता करूँ कि कौन सी वाली याद कर रही है!
दिमाग में जंग लग गया हो तो कौन-सा पेंट करवाए जिससे दिमाग बोल उठे।
अब तो बेसब्री से पतंजलि हर्बल प्रदूषण मुक्त पटाखों का इंतज़ार है।
जिन्हें जलाने से भृंगराज का शुद्ध हर्बल धुआं निकलेगा जो पर्यावरण को शुद्ध करेगा।
ये भल्लादेव का रथ कहाँ मिलेगा?
सोच रहा हूँ इस बार धनतेरस पर वही खरीद लूँ।
ये जो इंडिया वाले हैं वो ड्राई डे को दारु ढूंढ लेते हैं....
तो बैन होने के बाद पटाखे क्या चीज़ हैं।
एक होते हैं डरपोक, दूसरे होते हैं महाडरपोक, और फिर आते हैं वो जो पटाका जलने से पहले भाग लेते हैं।
एक बात जानना चाहता हूँ कि ये जो 200 का नोट निकाला है सरकार ने, इसका कोई फार्म भरना पड़ता है क्या?
अभी तक नहीं आया मेरे पास।
आज पढ़ी-लिखी लड़की का स्टेटस पढ़ा।
मेरा तो दिमाग ही सुन्न हो गया उसमे लिखा था, न मैं शादी करुँगी न अपने बच्चों को करने दूंगी।
दिवाली तो हर साल आती है,
दिलवाली ना जाने कब आयेगी।
~ भयंकर सिंगल
घर में 500/2000 के नोट हों तो धीरे-धीरे निकालते रहना।
8 नवंबर नज़दीक आ रहा है। याद दिलाना मेरा फ़र्ज़ है।



