संता: यार तुम रोज मंदिर क्यों जाते हो?
बंता: क्योंकि वहा पर आरती, पूजा, अर्चना, भावना, शांति, वंदना और उपासना है!

बंता: मिलने का समय आप मेरी सेक्रेटरी के साथ फिक्स कर लें!
संता: सर, मैं पहले दो बार कोशिश कर चुका हूँ वो मना कर देती है!

बंता: आप जो लेख अपने अखबार में लिखते हैं, उन्हें कोई मुर्ख भी पढ़ना नहीं चाहेगा!
संता: फिर तुमने पढ़ने का कष्ट क्यों किया?

बंता: आपने शराब कैसे छोड़ी?
संता: पूरी बोतल ख़त्म करके!

बंता: मान लो आप सोकर उठे हैं तो उसी वक्त आपको पता लगे कि आप लखपति बन गए हैं तो आप क्या करोगे?
संता: मैं फिर से सो जाऊँगा और तब तक सोता रहूँगा जब तक मैं करोड़पति न बन जाऊं!

संता: तुम दफ्तर में क्या काम करते हो?
बंता: कुछ नहीं!
संता: फिर तुम्हें यह कैसे पता लगता है कि काम खत्म हो गया!

बंता: आपकी ट्रांसफर इस शिकायतें सुनने वाले विभाग में क्यों कर दी गई है?
संता: क्योंकि मुझे कम सुनने लगा है!

संता: मेरी उम्र 40 साल है और मैं आज तक एक दिन के लिये बीमार नहीं हुआ!
बंता: अच्छा!
संता: हाँ जी! मैं बीमार होता हूँ तो 10-15 दिनों के लिये होता है!

संता: लगता है आपका बेटा डाक्टर बनेगा!
बंता: आपने यह अंदाजा कैसे लगाया!
संता: इसकी लिखाई देखकर!

बंता ग्राहक: इस मीट को तो कुत्ते भी नहीं खा सकते?
संता वेटर: कोई बात नहीं सर! मैं वो मीट लाता हूँ जिसे कुत्ते खा सके!

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