संता: मारे गये मेरा पर्स घर पर ही छूट गया!
बंता: अरे तुम तो कहते थे तुम्हारा नौकर बड़ा ईमानदार है?
संता: तभी तो! वो मेरा पर्स उठाकर मेरी पत्नी को पकड़ा देगा!

बंता: एक लेखक ने लिखा है कि पति को भी घर के मामलों में बोलने का हक होना चाहिये!
संता: वह बेचारा भी लिख ही सका, बोल नहीं सका!

बंता: सुना है आपकी पत्नी बहुत बड़े खानदान से आई है?
संता: आई है नहीं बहुत बड़ा खानदान लाई है!

बंता: क्या मिसिज़ गुप्ता का पति मरने के बाद उसके लिये कुछ छोड़ के गया है?
संता: मरने के बाद तो कुछ नहीं छोड़के गया पर जब वह जिन्दा था तो उसे कई बार छोड़ के गया था!

बंता: सुना है तुम्हारी पत्नी तुम्हारी पूजा करती है?
संता: हां! वह जो भी मरे आगे रखती है जलाके रखती है!

बंता: मैं दुनिया में सिर्फ दो ही लोगों की इज्जत करता हूँ!
संता: दूसरा कौन है?

बंता: आप क्या कर रहे हो?
संता: मैं अपनी जीतो को चिट्ठी लिख रहा हूँ!
बंता: पर आपको तो लिखना नहीं आता!
संता: उसे कौनसा पड़ना आता है!

बंता: स्वर्ग में कौन से लोग जाते है?
संता: मरे हुए!

बंता: मैं कभी भी अपनी प्रेमिका का बुरा नहीं सोच सकता!
संता: चलो फिर हम किसी और के बारे में सोचें!

संता: अगर मैं नारियल के पेड़ पर चढ़ जाऊ तो इंजीनियरिंग कॉलेज की लड़कियां दिख जायेंगी!
बंता: फिर हाथ छोड़ देना तो मैडिकल कॉलेज की लडकियां दिख जायेंगी!

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