जितना गौर से लोग टकराने के बाद एक दूसरे को देखते हैं उतनी गौर से अगर पहले ही देख लें, तो टक्कर ही नहीं होती।
"मोटापा" और "गंजापन" दो ऐसी चीजें हैं, जिसे दूसरे के पास ज्यादा देखकर जलन नहीं, बल्कि खुशी होती है।
चाणक्य तो रहे नहीं, सोचा मैं ही बाता दूं।
अब तो खैर लोग इतना नहीं रोते वरना, पहले लोग लड़की की विदाई के वक्त इतना रोते थे कि...
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दूल्हा भी कह देता था, "रख लो भाई... नहीं चाहिए!"
तमन्ना थी कि तेरे हाथों का रुमाल बनूँ लेकिन
तेरी जुकाम देखा तो इरादा बदल गया।
टैलेंट तो मेरे में कूट-कूट के भरा है,
फर्क बस इतना है कि थोड़ा बारीक कूट दिया, अब निकल ही नहीं रहा।
जो लोग जियो की सिम इस्तेमाल करते हुए भी सिंगल रह गए हैं,
मेरी नज़र में बस वो शरीफ हैं।
पता नहीं कुछ लड़कियाँ Lipstick लगा के पूरा दिन कैसे रह जाती हैं।
हम तो फाटे होठों की Vaseline भी चाट जाते हैं।
मोबाइल आने से एक अच्छा काम तो हुआ।
जब इंसान फ्री होता है तो मोबाइल चला लेता है।
पहले तो नाक में ऊँगली डाल-डाल कर, नाक की ऐसी-तैसी कर देता है।
एक सुंदर स्त्री यदि रोज़ सुबह सैर करती है तो 10 पुरुष निरोगी रह सकते हैं।
आज का महाज्ञान:
इंसान को जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए नहीं तो ठंडी लगती है भाई!



