सारा जहां है जिसकी शरण में;
नमन है उस माँ के चरण में;
हम है उस माँ के चरणों की धूल;
आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल।
शुभ नवरात्रि।
कभी सुबह सुहानी होगी;
जब रात आपक दीवानी होगी;
खूब मिलेंगे दुनिया की राहों में;
जो हमसे आपकी कहानी होगी।
शुभ दिवस।
बंता: तुम्हारी बीवी के दांतों का दर्द ठीक हुआ कि नहीं?
संता: हां, डॉक्टर को दिखाते ही ठीक हो गया।
बंता ने हैरानी से पूछा: अच्छा, कौन सी दवा से?
संता: दवा वगैरा कुछ नहीं। बस, डॉक्टर ने बताया कि यह बुढ़ापे की निशानी है, और उस दिन के बाद उसने दर्द की शिकायत ही नहीं की।
पठान (मरीज): डॉक्टर साहब मेरे पास इलाज के लिए पैसे नही हैं, आप मेरा इलाज कर दें तो शायद मैं भी कभी आपके काम आ सकता हूँ।
डॉक्टर: तुम क्या काम करते हो?
पठान: जी मैं कब्र खोदता हूँ।
टूटा हो दिल तो दुःख होता है;
करके मोहब्बत किसी से ये दिल रोता है;
दर्द का एहसास तो तब होता है जब;
किसी से मोहब्बत हो और उसके दिल में कोई और होता है।
सागर में गहराई होती है;
यादों में तन्हाई होती है;
इस व्यस्त जिंदगी में कौन किसको याद करता है;
और अगर कोई करता है तो उसकी यादों में सच्चाई होती है।
दुआ करते हैं हम सर झुका के;
आप अपनी मंजिल को पायें;
अगर आपकी राहों में कभी अँधेरा आये;
तो रोशनी के लिए खुदा हमें जलाये।
जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाएं।
देवी माँ के कदम आपके घर में आयें;
आप ख़ुशी से नहायें;
परेशानियाँ आपसे आँखें चुरायें;
नवरात्रि की आपको ढेरों शुभ कामनाएं।
शुभ नवरात्रि।
हो गई रात निकल गये सितारे;
आलने में चले गए सभ पंछी;
क्या खूब खिले नज़ारे;
आप देखें सपने प्यारे-प्यारे।
शुभ रात्रि।
प्रोफ़ेसर: ग़ालिब की आरजू थी कि महबूबा की जुल्फों से शराब के क़तरे टपकें और वो उन कतरों को हलक में उतार ले।
पप्पू: सर, अगर उन में जुएं होती तो ग़ालिब वो भी हलक में उतार लेते?
प्रोफ़ेसर: ग़ालिब की यह आरजू अपनी महबूबा से थी, तेरी बेबे कोलो नहीं।



