कोई हालात नहीं समझता, कोई ज़ज्बात नहीं समझता, ये तो अपनी-अपनी समझ की बात है जनाब, कोई कोरा काग़ज़ समझ लेता है, तो कोई पूरी किताब नहीं समझता!
अब तो अलमारी के अंदर के शर्ट-पैंट एक-दूसरे से पूछने लगे हैं कि.. मालिक हैं कि निपट गए! वो तो अच्छा हुआ कि पजामे ने बोल दिया... "वैसा कुछ नही भाई, मेरी तीनों शिफ्ट में ड्यूटी लगी है।"
आज दिन में नींद आ गयी तो सपने में देखा कि... सारे कोरोना वायरस को टिड्डी खा गयी और टिड्डियों को साईक्लोन उड़ा कर ले गया! साईक्लोन टिड्डियों को उड़ा कर चाइना ले गया और चीनी सारी टिड्डियों को खा गए!
आम खाने का मजा तब है जब गुठलियां भी शरमा कर बोल पड़े, "छोड़िये ना... बस कीजिये, लोग देख रहे हैं!"
'हँसी तो फँसी' ये योजना मास्क के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दी गयी है!
आज मन कर रहा था कोई गहरी बात लिखूँ, फिर सोचा कोई डूब गया तो लेने के देने पड़ जायेंगे!
जीजाओं और फ़ूफ़ाओं ने टीका लगवाने से इंकार किया! बोले मुफ्त में टीका क्यों लगवाएं? ससुराल में तो टीका लगाने के पैसे मिलते हैं!
आज सुबह एक विचार आया कि... यदि राजा-महाराजाओं से समय मोबाइल होते हैं तो सैनिक युद्ध लड़ने से पहले भाले पर मोबाइल बाँधकर सेल्फियां लेते!
किसी से उलझने का मन नहीं करता अब, आप सही, मैं गलत बस बात खत्म!
आज का ज्ञान : इंसान ठोकर खा कर ही चलना सीखता है, इसलिए रास्ते में पड़ा पत्थर कभी मत हटाइये!



