सदी का सबसे बड़ा मज़ाक: न्यूज़ चैनल वाले बता रहे हैं कि अफवाहें ना फैलायें!
संघर्ष पिता से सीखिए, संस्कार माँ से! बाकी घर के काम-काज तो बीवी सिखा ही देगी!
हम ज़िन्दगी भर ज़मीनों की कीमतों पर इतराते रहे! हवा ने अपनी कीमत माँगी तो ख़रीदी हुई ज़मीनें बिक गयी!
सिसकियां ले ले कर रो रहा है शहर; ना जाने खुदा को नींद कैसे आती होगी!
सिर झुकाने से सुकून मिलता है, इबादत से चेहरे पे नूर खिलता है, कोई खाली नहीं लौटा, कभी आपके दर से, वो अल्लाह ही है जो हर दुआ क़ुबूल करता है। ईद उल-फ़ित्र मुबारक!
थोड़ी सी इबादत बहुत सा सिला देती है, गुलाब की तरह चेहरा खिला देती है; अल्लाह की याद को दिल से जाने ना देना, कभी-कभी छोटी सी दुआ अर्श हिला देती है! अल्लाह को चाहने वाले सभी लोगों को ईद उल-फ़ित्र मुबारक!
अच्छे लोगों को ढूंढ़ना मुश्किल होता है, छोड़ना और भी मुश्किल और भूल जाना तो नामुमकिन! सुप्रभात!
कैसे रह लेते हैं लोग अपनी बीवी के बिना? मेरे तो पडोसी की बीवी मायके चली जाती है तो मेरा मन नहीं लगता!
आज ही मुझे अपनी असीम शक्तियों के बारे में पता चला! जब सुबह एक पड़ोसी ने पूछा, "और भैया ये कोरोना कब ख़त्म करवा रहे हो?"
वैक्सीन का हाल भी शादी के लिए लड़की देखने जैसा हो गया है! पहले पसंद नहीं आ रही थी, अब मिल नहीं रही है!



